इंदौर के पलासिया थाने में बजरंग दल पदाधिकारियों पर हुए लाठीचार्ज की जांच शुरू हो गई है।बजरंग दल कार्यकर्ताओ ने एडीजी के समक्ष दिए बयान-हमने गिरफ्तारी दी थी, सरकार ने एडीजी विपिन माहेश्वरी को जांच अधिकारी बनाकर इंदौर भेजा। सोमवार को मरीमाता स्थित पुलिस मेस में माहेश्वरी के समक्ष लाठीचार्ज के शिकार हुए कार्यकर्ता बयान देने पहुंचे। दस से ज्यादा कार्यकर्ताओं और पदाधिकरियों ने अपने बयान दर्ज कराए। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शन की सूचना को लेकर किए गए कॉल की रिकार्डिंग व अन्य सबूत भी सौंंपे।
सोमवार दोपहर एक बजे बजरंग दल संयोजक तन्नु शर्मा के साथ कार्यकर्ता पुलिस मैस पहुंचे। यहां एडीजी विपिन माहेश्वरी ने उनसे मुलाकात की। एक पदाधिकारी ने बयान में कहा कि प्रदर्शन की पूर्व सूचना दी गई थी। प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ पुलिस अफसर ज्ञापन लेने नहीं आए तो हमने दूसरे पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे गिरफ्तारी देना चाहते हैं। इसके बाद थाने पर बसें बुलवाई गईं।
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता बसों में सवार होने लगे थे, इस बीच कुछ पुलिस अफसरों ने टारगेट कर के पदाधिकारियों पर लाठियां बरसाना शुरू कर दी। जो कार्यकर्ता गिरफ्तारी देकर बस में बैठे थे। वे जब पिटाई का विरोध करने बस से नीचे उतरे तो उनको भी लाठियों से पीटा। इसके अलावा पत्थर भी पुलिस जवानों ने चलाए। गत गुरुवार को बजरंगियों पर लाठीचार्ज के बाद पलासिया के थाना प्रभारी और डीसीपी धर्मेंद्र भदौरिया को हटा दिया गया था।
नशे के खिलाफ प्रदर्शन किया था
बता दें, बजरंग दल पदाधिकारियों ने शहर में बिक रहे अवैध नशे को लेकर पलासिया थाने पर प्रदर्शन का एलान कर वहां गए थे। पदाधिकरियों का आरोप था कि अवैध नशा बेचने वालों के दबाव में बजरंग दल के पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस प्रकरण दर्ज कर रही है। प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल कार्यकर्ता वाहन रोकने लगे। इसके बाद पुलिस नेे लाठीचार्ज कर दिया और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जांच के आदेश दिए थे। मिश्रा ने सोमवार को पुलिस की पिटाई से घायल बजरंग दल के विभाग मंत्री राजेश बिंजवे से फोन पर चर्चा भी की थी।
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